" सा विद्या या विमुक्तये "

|| चेन्नई गुरूकुलम् ||

( श्री आदि पार्श्वनाथ जैन आर्य संस्कार विद्यापीठ, चेन्नई )

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मिड ब्रेन

मलखम्ब कला

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विद्या

‘चेन्नई-गुरूकुलम्’ (श्री आदि पार्श्वनाथ जैन आर्य संस्कार विद्यापीठ) में ऋषिमुनिओं द्वारा प्रतिपादित प्राचीन विद्याओं एवं विविध शास्त्रों का अध्ययन कराया जाता है।

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कला

‘चेन्नई-गुरूकुलम्’ (श्री आदि पार्श्वनाथ जैन आर्य संस्कार विद्यापीठ) में विभिन्न प्रकार की जीवन – उपयोगी कलाओं एवं प्रवृत्तियों का अभ्यास कराया जाता है।

विविध प्रकार के प्रशिक्षण द्वारा मानसिक और शारीरिक संतुलन, निडरता एवं एकाग्रता आदि गुणों का विकास हो ऐसी क्रियाओं का अभ्यास कराया जाता है।

अनर्थकारी आधुनिक शिक्षा का प्रभावशाली विकल्प

” महर्षिओं द्वारा प्रस्थापित पुरुषों की ७२ एवं स्त्रीयों की ६४ कला आधारित श्रेष्ठ आर्य शिक्षा “

‘चेन्नई गुरूकुलम्’ (श्री आदि पार्श्वनाथ जैन आर्य संस्कार विद्यापीठ) आर्यशिक्षण प्राप्त करने के लिए श्रेष्ठ विकल्प है । यह संस्था आधुनिक विनाशकारी मेकोले शिक्षा-पद्धति से देश को मुक्त करवाने के लिए प्रयत्नशील है । व्यक्ति-निर्माण से कुटुम्ब-निर्माण, कुटुम्ब-निर्माण से समाज निर्माण, समाज निर्माण से राष्ट्र-निर्माण एवं राष्ट्र-निर्माण से विश्वनिर्माण करने में अपना महत्वपूर्ण सहयोग करने के लिए कटिबद्ध है । हम मानते हैं कि इस ‘गुरूकुलम्’ से प्रशिक्षण प्राप्त करके बाहर आए हुए विद्यार्थी ‘मेकोले-पुत्र’ नहीं, किन्तु ‘महर्षि-पुत्र’ बनकर भारत को जगद्‌गुरु बनाने में अपना योगदान करेगे । विद्यार्थीओं को इस पाठशाला में तत्त्वज्ञान, प्रभुभक्ति के संस्कारों के साथ-साथ संस्कृत, हिंदी, गुजराती, अंग्रेजी, गणित, वैदिक गणित, आयुर्वेद, ज्योतिष्‌, धर्म शास्त्र, न्याय शास्त्र, नीति शास्त्र, वास्तु शास्त्र (Architechture), संगीतकला (गीत-नृत्य-वादन), अभिनय/नाट्य कला, चित्रकला, हस्तलेखन कला, नामा लेखा (Account), परा मेधा (Mid-Brain), आयोजन-प्रबन्ध (Management), योगाभ्यास, इतिहास, भूगोल, पोल/रोप मलखम, कराटे, मार्शल आर्ट, अश्वसंचालन कला (Horse Riding), कुश्ती आदि सिखाया जाता है । 

शिक्षा से सुराज्य

ध्वस्त हुई प्राचीन शिक्षा प्रणाली को पुनर्जीवित किए बिना भारतीय प्रजा एवं संस्कृति का समुद्धार असंभव है। गुरुकुलम् एक संस्कारी, समृद्ध एवं सुखी राष्ट्र-निर्माण के महायज्ञ का यजमान है।

श्रेष्ठ संकुल

गोबर से लिंपा हुआ संकुल, अंतरिक्ष जल का संचय, जैविक (ओर्गेनिक) खानपान और देशी गाय के दुग्ध एवं धृत सहजता से यहाँ उपलब्ध है । यहाँ का वातावरण छात्रों में दिव्य चेतना का संचार करता हैं।

श्रेष्ठ शिक्षक

अपने अपने क्षेत्र में जिन्होंने उच्च कीर्तिमान प्रस्थापित किये है ऐसे गुणवान्‌ एवं चारित्रवान्‌ गुरुजन यहाँ पर शिक्षा प्रदान करते हैं । तन, मन एवं आत्मा का सुख प्रदान करें ऐसी शिक्षा देने के लिए कटिबद्ध हैं।

श्रेष्ठ शिक्षा

यहाँ विद्या, कला, कौशल्य, शौर्य एवं पराक्रम की शिक्षा से छात्रों के जीवन को प्रशिक्षित किया जाता हैं । छात्रों को महर्षियों द्वारा प्रस्थापित पुरुषों की ७२ कलाओ पर आधारित श्रेष्ठ प्रशिक्षण दिया जाता हैं।

श्रेष्ठ संस्कार

न्याय, नीतिमत्ता, प्रामाणिकता, सदाचार, संतोष, मैत्री एवं नम्रता जैसे गुणों का विकास एवं उच्च नैतिक मूल्यों से समाज एवं परिवार का गौरव बढ़ा शके ऐसे सशक्त छात्रों का निर्माण हमारी प्राथमिकता हैं ।

दिनचर्या

गुरूकुलम् के छात्रों की दिनचर्या आधुनिक विकृतियों से दूर, आर्य परम्पराओं के आचार-पालन के साथ और जैविक (रासायनिक-जंतुनाशक रहित) आहार सहित सु-व्यवस्थित की गई है।

डॉ. प्रवीण तोगड़िया (अंतर्राष्ट्रीय अध्यक्ष - विश्व हिन्दू परिषद्)

“अगर देश को बदलना है तो गुरुकुल पद्धति की शिक्षा अनिवार्य है । संस्कृति का देशव्यापी अभियान चलाकर इस देश में सांस्कृतिक जागरण का महायज्ञ भी साथ में करना चाहिए और हमें लगता है की हमारे उत्तमभाई का प्रयास भारत को भारत बनाकर रहेगा ।”

- पू. आत्मानंद सरस्वतीजी (राष्ट्र प्रेमी संत - बोटाद)

“आज़ादी के बाद पहली बार हिन्दुस्तान में जन्म लिया और हिन्दुस्तान में साँस ले रहें हो ऐसा अनुभव हो रहा हैं । यह संस्कृत पाठशाला का दिव्य विचार समग्र विश्व में फैला जाए और मैकाले पद्धति जो पशुता की और ले जा रही है उसका सत्यानाश हो जाए ।”

श्री भूपेन्द्रसिंह चुडासमा (शिक्षा मंत्री - गुजरात राज्य)

“गुरुकुलम्‌ के विद्यार्थियों की प्रज्ञा, कुशलता, भाषा, परिवेश आदि मैंने एक कार्यक्रम में प्रत्यक्ष देखें हैं, जो कि अद्‌भुत हैं । ऋषिकालीन शिक्षा परम्परा, प्राचीन विद्या, विद्यार्थीयों की प्रज्ञा, लोक संस्कृति, धर्म रक्षा आदि आदर्शों को साकार करने का यहाँ हो रहा भागीरथ प्रयत्न अभिनंदन के योग्य है । मैं इस गुरुकुलम् की सर्वोत्तम सफ़लता की कामना करता हूँ ।”

श्री विनीतजी नारायण (वरिष्ठ पत्रकार)

“गुलामी की जंजीरें तब टूटेगी, जब भारत का हर युवा प्राचीन गुरुकुल परम्परा से पढ़कर अपनी संस्कृति और अपनी परम्पराओं पर गर्व करेगा तब भारत फ़िर से विश्वगुरु बनेगा, आज की तरह कंगाल नहीं ।”

डॉ. वेदप्रतापजी वैदिक (वरिष्ठ पत्रकार)

“पिछले ६०-६५ सालों में मैंने ऐसा पूर्ण गुरुकुल कहीं नहीं देखा । ये जो बच्चें हैं वे प्रतिभा की खदान हैं, अगर ऐसे बच्चें हर साल ५-१० लाख भी पैदा हो जाएँ, तो १८-२० करोड़ हमारे जो विद्यार्थी निकलते हैं, सबका जीवन प्रकाशित हो जाए ।”

डॉ. मफतलाल पटेल (शिक्षाविद्)

“स्कूल कैसे चाहिए तो यह स्कूल देख लीजिए, गुरु कैसे चाहिए तो यह गुरु देख लीजिए और विद्यार्थी कैसे चाहिए तो यह विद्यार्थी देख लीजिए । सब कुछ यहाँ हैं । मैं सरकार को यह लिख के भेजने वाला हूँ की देखो यहाँ आकर की शिक्षा का स्कूल कैसा होना चाहिए, किस तरह शुरुआत करनी चाहिए, यहीं है, सब कुछ इधर ही हैं ।”

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आयोजन

अंतर्राष्ट्रीय विराट गुरुकुल सम्मेलन (28-04-2018)

गुरुकुल (बालक)

केसरवाड़ी तीर्थ
Gandhi Road, Puzhal, Chennai.

Ph: 9176888696

गुरुकुल (कन्या एवं शिशु)

माधवरम
Ph: 6379853800

Email

info@gurukulam.org

chennaigurukul@gmail.com 

Email

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